मानव रूप में इश्वर को अवतार कहते हैं। मानव जन्म लेता है और मरता है। ऐसे ही आधुनिक
युग के अवतार "मेहेर बाबा" हैं जिनकी पुण्यतिथि को "
अमर तिथि"
कहते हैं। बाबा ने कहा था की अवतार के धरती पर आने के बाद ७०० से १४०० साल में उसके उपदेशों की रूढी
बन जाती है
-- विकृति आ जाती है। 
अमर तिथि २००९
(१)
चलीसवे अमर तिथि में
भीड़ बढ़कर पचीस हज़ार हो गई,
पहले के "चोज़ेन-फियू" के
मन का "उत्स"
"मोब" का "उत्सव" बन
पसर गई।
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हृदय का द्वार खुला रह गया,
अनुभूति की जगह
चेतना में खोपडी (मस्तिष्क) के रास्ते
अनुभव घुस गया;
जैसे आपके आने का "काउंट डाउन"
शुरू हो गया।
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आपके जाने के बाद, "आरनगौव" हुआ "मेहेराबाद"
अब आपकी याद आती हैं जैसे
ट्रेन गुज़र जाने के बाद,
रेल कि पटरियां थरथराती हैं।
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आपके ही बताया था --
'याद' पहले 'इबादत'
फिर 'आदत'और फिर 'रस्म' बन जायेगी,
जैसे पटरियों की थरथराहट
धीरे ध्रीरे
बीती बात हो जायेगी.
----फिर आना, और जाना
धरम की एक और विधि बन जाएगी
सीखना या जागना कौन चाहेगा --
बस अमरतिथि रह जाएगी !
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(२)
दो साल पहले आया था (मैं)
अमरतिथि का स्टेज प्रोग्राम बड़ा भाया था --
भजनों, ग़ज़लों. गीतों और नाटकों को देख
गला भर आया था आह !
वाह पी पी पी ट्रस्ट वाह !!
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दर्शन की लाइन में खड़े खड़े
क्लोज़ सर्किट टेलिविज़न पर
आप की समाधि दिखती रहती थी --
गीत - ग़ज़ल नामधुन नेपथ्य में
आपकी छवि और याद मन में !
सटीक लगता था
आने का और स्टेज प्रोग्राम का उद्देश्य --
समाधि में आप को नमन प्रमुख,
गीत-ग़ज़ल घलुए में.
पर
सात सौ की कौन कहे
चालीसवें वर्ष से ही
प्रतीत होता है
गीत भजन श्रवण सुख प्रमुख--
आपको नमन घलुए में !!
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क्लोज सर्किट कैमरे का मुख क्यों मोड़ दिया ?
अमरतिथि का फोकस क्यों छोड़ दिया ?
धीरे ध्रीरे रस्मोरिवाज बनती अमरतिथि !
इतिहासों का इतिहास बनती अमरतिथि !!
------------------------------------------------- मेहेराबाद, अहमदनगर (महाराष्ट्र)
ऍम ० पी ० आर ० R No M - ११८
३१ जनवरी , २००९